नंदा जाही का रे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।घर के तीर म बॉस के झाड़ीहोवत संझाती सबो करय तियारीझगरा होवय सुते बर रथिया संग संगवारीचूँ चूँ नरईयय लागय सबो गूढ़हेला मन भारीतीर म रहय कुकरी गोधा,ते कर रहय परई हरनंदा जाही का रे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर। होवत बिहनिया सुरुज केContinue reading “गौरैया(गूढ़हेला)”