गौरैया(गूढ़हेला)

            
नंदा जाही का रे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।
घर के तीर म बॉस के झाड़ी
होवत संझाती सबो करय तियारी
झगरा होवय सुते बर रथिया संग संगवारी
चूँ चूँ नरईयय लागय सबो गूढ़हेला मन भारी
तीर म रहय कुकरी गोधा,ते कर रहय परई हर
नंदा जाही का रे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।

होवत बिहनिया सुरुज के अँजोर म
जा के बैठय खपरा छानी के छोर म
घर के फईरका खुले तब चूँ चूँ नरईयय
खाय बर दिही कहिके मनके ल नई डराय
घर के तीर म तरईया जेकर रहय रुख सरई हर
नंदा जाही का रे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।।

टप -टप पानी गिरय त, घर के पोल म लुकाय
गिरे रहय कोनो कना त खाके कनकी म भुलाय
पानी हर छोड़े त अँगना म जा के फूदफुदय
घर के बैईला कोठा म पैरा के घर ल बनाय
बाबू नागर जोते त बढ़िया बनय हरई हर
नंदा जाही कारे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।।

कहा लुकागे मोर घरसुंदरी(गूढ़हेला)
घर ल सुना कर के।
तोर बिना खोल रोवत हे
अउ रोवत हे गाँव के मेला मड़ई हर
नंदा जाही कारे मोर गाँव के गूढ़हेला चिरई हर।।

           राकेश चतुर्वेदी”राही”
           7354127727

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